शनिदेव के प्रकोप को शांत कैसे करें जानिए चमत्कारी उपाय

Shani ke Prakop Se Kaise Bache: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि नवग्रहों का सबसे कठोर और शक्तिशाली देवता है। शनिदेव धर्मी होकर पापियों को दंड देते हैं और अच्छे कर्म करने वालों को सुख, यश, कीर्ति और वैभव प्रदान करते हैं। 2022 को शनि का परिवर्तन होगा। शनि धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेगा। शनि एक राशि की परिक्रमा दूसरे डेढ़ वर्ष में करता है। जिससे 5 लोगों के लिए पनोती का चरण शुरू हो जाएगा। लेकिन आज जानिए शनि की पाणोटी या सदाशती क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

शनिदेव जब भी किसी राशि में प्रवेश करते हैं तो उनके लिए सदाशती शुरू हो जाती है। यह समय के अनुसार प्रत्येक राशि पर ढाई वर्ष के तीन चरणों में आता है। प्रथम चरण में जातक को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। इस दौरान जातक को जो कुछ भी करना है उसका नुकसान उठाना पड़ता है। मेहनत करने पर भी उसे कोई फायदा नहीं होता।

सदासती का दूसरा चरण पारिवारिक समस्याओं को बढ़ा देता है। हालांकि, अगर इस दौरान रिश्तेदारों में सामंजस्य बना रहे तो उन्हें जल्दी राहत मिलेगी। इस समय गुस्सा करने से मुश्किलें बढ़ जाती हैं।

शनिदेव

शनि के तीसरे चरण में मानवीय सुख-सुविधाओं में कमी आती है। लेकिन लोगों के साथ अच्छे व्यवहार, नैतिकता और अच्छे आचरण से जातक को फायदा हो सकता है। इस समय पनोती के प्रभाव में पैदा हुए लोगों को बहुत सावधान रहना चाहिए।

शनिप्रकोप, शनिदेव का प्रकोप कब होता है?

जब शनि की पाप दृष्टि जन्म राशि पर पड़ती है या जब शनि जन्म राशि से 4-8 स्थानों में परिक्रमा करता है, साथ ही जब शनि स्व राशि से 12-1-2 स्थान पर परिक्रमा करता है, तो जातक को छोटे बड़े का सामना करना पड़ता है। शनिप्रकोप इस दौरान जातक को आर्थिक के साथ-साथ शारीरिक रूप से भी कष्ट उठाना पड़ता है। हालाँकि शनि बहुत धीमी गति से चलने वाला देवता है। वे तीस साल में एक बार सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा पूरी करते हैं। इसलिए किसी भी जातक के जीवन में डेढ़ दो या तीन बार ही आ सकता है।

शनि को शांत करने का आसान उपाय

शनिप्रकोप के दौरान शनिदेव को शांत करने और राहत पाने के लिए निम्नलिखित मंत्रों का जाप किया जा सकता है। इसके अलावा नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी पनोती का समय आसानी से बीत जाता है।

शनिदेव के प्रकोप को शांत करने के लिए सबसे पहले तो शनिवार के दिन सुबह जल्दी से नाह धो के शनिदेव का मंदिर हो वह पे जाना चाहिए और शनिदेव भगवन पे दिया अगरबत्ती और फूलों की माला पहननी चाहिए और सरसों का तेल और काले तिल भी चढ़ाना चाहिए। शनिवार के दिन उपवास भी करना चाहिए। ऐसा करने से शनिदेव के प्रकोप से कुछ हद तक बचा जा सकता है।

इस मंत्र का जाप करें

ह्रीं नीलांजन समभासम रविपुत्र यमराजम
छाया मार्तंड शंभूतम तम नमामि शनैश्चरम्

सूर्य लोंग देह विशालाक्ष के पुत्र: शिवप्रिया:
मंडाचार: प्रसन्नात्मा पिदान हरतु में शनि:

शनिदेव

शनिदेव के प्रकोप सी बचने के लिए हमेशा सभी का भला ही करे दिन में कुछ न कुछ दान करे ऐसा करने से शनिदेव खुश होते है। फिर आपकी छोटी मोती गलतिया शनि देव माफ़ कर देते है। दोस्तों इसी तरा से आप शनिदेव के प्रकोप से बच भी जाते है और आप पर शनिदेव की कृपा भी बनी रहती है। अगरआपको शनिदेव दंड दे भी रहे है तो आपको सही मार्ग पे लाने के लिए क्यों की शनिदेव अपने भक्तो का हमेशा भला ही चाहते है। आप भी बोलिये जय शनिदेव।

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